Monday, 1 May 2017

संरक्षणवाद से प्रभावित हो सकता है निर्यात

देश के अग्रणी उद्योग मंडल फिक्की ने रविवार को कहा कि दुनिया के विकसित देशों में संरक्षणवाद की नई लहर के चलते भारत का निर्यात कारोबार प्रभावित हो सकता है। फिक्की ने अपने हालिया 'बिजनेस कान्फिडेंस सर्वे' के परिणामों का हवाला देते हुए कहा, "वैश्विक विकास दर में लगातार सुधार हो रहा और दुनिया के अधिकांश हिस्से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन संरक्षणवाद की तेज होती लहर और नौकरियों के सृजन तथा विकास को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने अंदरूनी उद्योगों की ओर ध्यान देने की नीतियों में आई तेजी के चलते निर्यात कारोबार प्रभावित हो सकता है।"

फिक्की ने एक बयान जारी कर कहा कि यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय उद्योग पहले से ही मांग में कमी की मार झेल रहा है, क्योंकि अधिकतर कंपनियों को कम दर पर ऋण का लाभ नहीं मिल पा रहा। फिक्की द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में 67 फीसदी लोगों ने निचली दरों पर ऋण का लाभ मिलने से जुड़े सवाल का जवाब नकारात्मक दिया। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बीते शुक्रवार को कहा है कि विदेशी निवेश के मामले में भारत को वैश्विकरण का काफी लाभ मिला है, खासकर तब जब घरेलू निजी निवेश की दर धीमी रही। पिछले वर्ष भारत का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 18 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 46.4 अरब डॉलर हो गया, जबकि इस दौरान वैश्विक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में गिरावट दर्ज की गई।

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