Thursday, 4 May 2017

कोल इंडिया परिवहन दरों में मनमाना बदलाव नहीं कर सकती

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि देश की सबसे बड़ी खनन कंपनी कोल इंडिया लि. (सीआईएल) भूतपूर्व सैनिकों द्वारा चलाई जा रही कंपनियों की लदाई और परिवहन की दरों में रक्षा मंत्रालय के पुर्नवास महानिदेशालय (डीजीआर) के परामर्श के बिना मनमाने ढंग से संशोधन नहीं कर सकती। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताभ राव की खंडपीठ ने सीआईएल और उसकी सहयोगी कंपनी महानदी कोल लि. द्वारा दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया जिसमें डीजीआर के परामर्श के बिना दरें संशोधित करने की खनन कंपनी के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई थी। 

साल 1979 में ऊर्जा मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के बीच पूर्व सैनिकों के पुनर्वास के लिए एक योजना को लेकर समझौता हुआ था। सीआईएल और डीजीआर के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) में भुगतान की रूपरेखा सालाना आधार पर साथ मिलकर तैयार करने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

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